तुझको छोड़ा है मैने तेरी खैरियत के लिए
खुद को जीने के लिए बाप की पगड़ी के लिए
प्यार करता ही नहीं कोई प्यार की खातिर
कोई चमड़ी के लिए तो कोई दमड़ी के लिए
मेरा तकिया मेरे गम की कहानी कहता है
ये जो हंसती हूं ना मैं सब है दिखावे के लिए।
नहीं करता है कोई इश्क जहां में प्रज्ञा
ये जो बनते हैं रिश्ते बस हैं छलावे के लिए।
लिखे हैं खत उसे इतने की बिक गए हैं खुदी
नहीं हैं पैसे पास में जहर खाने के लिए।
अब तो हर कोई मेरा साथ आजमाता है
लोग आते ही हैं मुझे छोड़ कर जाने के लिए।
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