ऐसे साजन हों हमारे

ना कभी पीते हों सिगरेट
न उन्हें होता हो रिगरेट
ना रहे इगो में अपने
ना कभी चिल्लाए मुझ पर
खाना वाना वो बना लें
पांव भी मेरे दबा लें
मैं सोऊं टांगे पसारे
बच्चा भी वो ही संभाले।
सर झुका रहता हो जिनका
ऐसे हों साजन हमारे।

जो कहूं वो मान लें वो
दिन हैं अच्छे जान लें वो
ले चले शॉपिंग पे मुझको
झोला वोला थाम लें वो
जुल्फों में सेट वेट लगा के
कूची का चश्मा लगा के
हर जगह टिपटॉप बनकर
ही चले ना बास मारे।

जब मैं चिल्लाऊ अकड़कर
माफ़ी मांगे पांव पड़ कर
बाबू मेरी गलती थी बस
ये कहें जब जाऊं लड़कर
रूह थर थर कांप जाए
जब भी मेरा जिक्र आए
ना कभी कहना पड़े कुछ
समझे आंखों के इशारे।

इंस्टा fb, x सबका
कोड मुझको भी पता हो
हो लोकेशन ट्रेस हरदम
ड्रोन पीछे घूमता हो
चिड़िया या फिर हो चिरौटा
भैया ना हमको है मौका
बीवी मेरी सूत देगी
ये ही कह कर बात टारें।

प्रज्ञा शुक्ला, सीतापुर

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