गुरूर हो हमें

गुरूर हो हमें तो अपनी किस अज़मत1 का,
जर्रा भर भी नहीं हम, कायनात-ए-अज़ीम2में।

1. प्रतिष्ठा; 2. बहुत बड़ी दुनिया।

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