Panna, Author at Saavan's Posts

बन रंगरेज इस तरह रंग डाले

बन रंगरेज इस तरह रंग डाले, रंग ए रूह और भी निखर जाए। मिले गले इस तरह दोस्त बनकर, दुश्मनी हो अगर, टूटकर बिखर जाए।। »

रंग ए रूह

जब सब चेहरे के रंग को ही देखते है रंग ए रूह का पता कैसे चले »

जिंदगी के किनारे

जिंदगी के किनारे रहकर जिंदगी गुजार दी मझधार में आये तो जिंदगी ने दबोच लिया »

दर्द

दर्द

#kavita #poetry #Shayari #poetrywithpanna »

रंगरेज

बन रंगरेज इस तरह रंग डाले, रंग ए रूह और भी निखर जाए। मिले गले इस तरह दोस्त बनकर, दुश्मनी हो अगर, टूटकर बिखर जाए।। »

मिलना ना हुआ

कितनी मन्नतें माँगी, तब तुझसे मिलना हुआ, मगर मिलकर भी, हमारा मिलना ना हुआ। »

Guftagu Band Na Ho

Guftagu Band Na Ho

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जानता हूं तुम नहीं हो पास

जानता हूं तुम नहीं हो पास

जानता हूं तुम नहीं हो पास, समझता भी हूं| मगर जो मैं महसूस करता हूं हर पल उसे झुठलाऊं कैसे? »

दास्तान

इक दास्तान है दबी दिल में कहीं कोई सुने तो हम सुनाये कभी| »

जिंदगी

गुजरती जाती है जिंदगी चुपके से लम्हो में छुपकर बहुत ढूढता हूं इसे, मगर कभी मिलती ही नहीं »

नज्म

इक नज्म है जो दबी हूई है दिल की दरारों में आज फिर बहुत कोशिश की मगर निकल ना पाई »

जिंदगी

जितना जिंदगी को पास बुलाओ जिंदगी उतना दूर हो जाती है मंजिलो पर नजर रखते रखते पैरों से राह गुम हो जाती है »

मुक्तक

देखा है दुनिया को अपनी दिशा बदलते अपने लोगो को अपनो से आंखे फ़ेरते कतरा कतरा जिंदगी का रेत फिसलता जाता है देखा है जिंदगी को मौत में बदलते »

वक्त

नहीं मालूम कहां गुम है वक्त सब ढूढ़ना चाहते है मगर ढ़ूढ़ने को आखिर वक्त कहां है सब कहते फिरते है, वक्त निकालूंगा वक्त निकालने को आखिर वक्त कहां है »

मुखौटा

इक मुखौटा है जिसे लगा कर रखता हूं जमाने से खुद को छुपा कर रखता हूं दुनिया को सच सुनने की आदत नहीं सच्चाई को दिल में दबा कर रखता हूै बस रोना आता है जमाने की सूरत देखकर मगर झूठी हंसी चेहरे से सटा कर रखता हूं आयेगी कभी तो जिंदगी लौट के मेरे पास इंतजार में पलके बिछा कर रखता हूं आज इक नया मुखौटा लगा कर आया हूं मैं कई सारे मुखौटा बना कर रखता हूं »

नजरे

इक अरसे बाद नजरे मिली उनसे हमारी नजरों ने पहचाना और अन्जान कर दिया »

दिन, महीने और साल

दिन, महीने और साल गुजरते जाते हैं और इक दिन आदमी भी इनमें गुजर जाता है| »

मिलना न हुआ

कितनी मिन्नतों के बाद में मिला तुझसे मगर मिलकर भी मेरा मिलना न हुआ क़ी कई बातें, कई मर्तबा हमने मगर इक बात पे कभी फैसला ना हुआ »

अब नहीं होगा जिक्र

अब नहीं होगा जिक्र आपका हमारे आशियाने में न होगी नज्म कोई आपके नाम से »

दिन, महीने और साल

दिन, महीने और साल गुजरते जाते हैं और इक दिन आदमी भी इनमें गुजर जाता है| »

बात से बात चले

गुफ़्तगु बंद न हो, बात से बात चले मैं तेरे साथ चलूं, तू मेरे साथ चले| »

आज कुछ लिखने को जी करता है

आज कुछ लिखने को जी करता है आज फिर से जीने को जी करता है दबे है जो अहसास ज़हन में जमाने से उनसे कुछ अल्फ़ाज उखेरने को जी करता है »

दास्ता ए जिंदगी

चंद पन्नों में सिमट गयी दास्ता ए जिंदगी अब लिखने को बस लहू है, और कुछ नहीं| »

इक रब्त

इक रब्त था जो कभी रहता था दरम्या हमारे किस वक्त रूखसत हुआ, खबर नहीं| »

कफ़स

कफ़स

इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं   (कफ़स  = cage) हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में अब इन पर नये पत्ते, मैं कहॉ से लाऊं जले हुए गांव में अब बन गये है नये घर अब इन घरों में रखने को नये लोग, मैं कहॉ से लाऊं बुझी-बुझी है जिंदगी, बुझे-बुझे से है जज्बात यहॉ इस बुझी हुई राख में चिन्गारियॉ, मैं कहॉ से लाऊं पथरा गयी है मेरे ख्यालों की दुनिया अब इस दुनिया में ... »

चमकता जिस्म, घनी जुल्फ़े

चमकता जिस्म, घनी जुल्फ़े

चमकता जिस्म, घनी जुल्फ़े, भूरी भूरी सी आंखे यही है वो मुज़रिम जिसने कत्ल ए दिल किया है – Panna »

लिखते लिखते आज

लिखते लिखते आज कलम रूक गयी इक ख्याल अटक सा गया था दिल की दरारों में कहीं| »

खेल

खेल

जिंदगी खेलती है खेल हर लम्हा मेरे साथ नहीं जानती गुजर गया बचपन इक अरसा पहले खेल के शोकीन इस दिल को घेर रखा है अब उधेड़ बुनों ने कसकर अब इनसे निकलूं तो खेलूं कोई नया खेल जिंदगी के साथ| »

अगर तुम न मिलते

जिंदगी का कारवां यूं ही गुजर जाता अगर तुम न मिलते हमारे लफ़्जों में कहां कविता उतरती अगर तुम न मिलते »

मुकम्मल जिंदगी

मुकम्मल जिंदगी की खातिर क्या क्या न किया जिंदगीभर हमने मगर इक अधूरापन ही मिला जिसे साथ लिए घूमता रहता हूं मैं| »

अक्स

अपने ही अल्फ़ाजों में नहीं मिल रहा अक्स अपना न जाने किसको मुद्दतों से मैं लिखता रहा| »

गम की हवेली

गम की हवेली

**** था पहले दिल मेरा इक गम की हवेली अब हजारों गमों के झुग्गीयों की बस्ती हो गया!! ****   »

दास्ता ए इशक

लिखते लिखते स्याही खत्म हो गयी दास्ता ए इशक हमसे लिखी न गयी| »

सावन के आने से पहले

कभी वो भी आयें, उनकी यादों के आने से पहले फ़िजा महक भी जाये, सावन के आने से पहले »

डर

इक अजीब सा डर रहता है आजकल पता नहीं क्यों, किस वजह से, किसी के पास न होने का डर या किसी के करीब आ जाने का| »

जिंदगी को जैसे पर लग गये

जिंदगी को जैसे पर लग गये

कभी गुजरती थी जिंदगी धीरे धीरे, कभी साइकिल पे, कभी पैदल इक बचपन क्या गुजरा जिंदगी को जैसे पर लग गये »

दर्द ए अश्क

तेरा  ज़िक्र  तो  हर  जगह  होता  है दर्द ए अश्क आंखों में जो भरा होता है »

लफ़्जों का खेल

लफ़्जों का खेल तो देखो कभी हंसाते है, कभी रूलाते है »

Yun Ikraar e ishq me tu taakhir na kar

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न हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर में

  न  हुई  सुबह  न  कभी  रात इस दिल ए शहर में कितने   ही   सूरज   उगे   कितने   ही  ढलते  रहे »

हमें यूं बदनाम होना भी अच्छा लगा

कर रहे थे बसर जिंदगी गुमनाम गलियों में आपकी मोहब्बत ने हमें मशहूर कर दिया पुकारने लगे लोग हमें कई नामों से हमें यूं बदनाम होना भी अच्छा लगा आपका तस्व्वुर हमारे ज़हन में गुंजता रहता है ज़हन से उसे जुबां पर लाने का हौसला नहीं आपकी यादो ने जो हमें गाने को जो किया मजबूर हमें यूं बेसूरा गाना भी अच्छा लगा आपका अहसास ही तो हमारी जिंदगी है बिना आपके जिंदगी का क्या मायना है दो पल शम्मा से गुफ़्तगु करने की खात... »

दीया

लङता अंधेरे से बराबर नहीं बेठता थक हारकर रिक्त नहीं आज उसका तूणीर कर रहा तम को छिन्न भिन्न हर बार तानकर शर लङता अंधेरे से बराबर   किया घातक वार बयार का तम ने पर आज तानकर उर खङा है मिट्टी का तन झपझपाती उसकी लो एक पल पर हर बार वह जिया     जिसने तम को हरा रात को दिन कर दिया   मिल गया मिट्टी मे मिट्टी का तन अस्त हो गया उसका जीवन लेकिन उस कालभुज के हाथों न खायी शिकस्त बना पर्याय दिन... »

बिना कलम मैं कौन ?

बिना कलम मैं कौन ?

बिना कलम मैं कौन क्या परिचय मेरा कहां का रहवासी मैं शायद कविता लिखने वाला कवि था मैं पर अब मै कौन बिना कलम मैं कौन   कलम के सहारे नन्ही नन्ही लकीरों से रचता मैं इन्द्रजाल सजते शब्द शर स्वतः और कर देते हताहत क्ष्रोता तन को लेकिन अब रूठ गयी कलम मुझसे नष्ट हो गए सारे शर रिक्त हो गया मेरा तूणीर विलीन हो गया रचित इन्द्रजाल और मैं हो गया मायूस मौन बिना कलम मैं कौन »

मेरी आवाज दबा दी गयी

मेरी आवाज दबा दी गयी मेरे अल्फ़ाज मिटा दिये गये जला दिया मेरा जिस्म भी दुनिया ने मगर ख्वाहिशे कहां मिटती है ढ़ूढ़ लेती है कोई न कोई राह निकल पडती है परत दर परत मिट्टी में मिलने के बाद इक नन्हे पौधे की तरह! »

जब बन जाता है हमारा याराना

इक वक्त, इक रब्त जुड़ा था,   [रब्त = Relation] वक्त गुजर गया, रब्त रह गया कुछ लम्हो की दास्ता बनकर ये याराना पक्के अल्फ़ाजों में ज़हन में छप गया कुछ पल अजीज है बहुत, कुछ लोग अजीज है दूर हो कितने भी अरसा गुजर जाने के बाद भी करीब लगते है, अपने लगते है जिंदगी इनके होने से ही अपनी लगती है, मुकम्मल लगती है, जिंदगी की दास्ता  [मुकम्मल  = Complete] जब रब्त जुड़ता है जब बन जाता है हमारा याराना Happy B’d... »

भूखी दास्तां (Poetry on Picture Contest)

भूखी दास्तां (Poetry on Picture Contest)

वो आंखे आज तक चुभती है मुझको एक दम खाली, खाली कटोरे सी जो पूछ रही हों, कह रही हो अपनी भूखी दास्तां लफ़्ज ही बेबस है, नहीं समेट सकते दर्द को उनके खाली है वो भी उनके खाली पेट की तरह! »

नहीं हो जब कोई अंजाम

नहीं हो जब कोई अंजाम, अगर आगाज़ का बस इक राह हो, न कोई मंजिल हो दिल में बस मोहब्बत हो, दिल मिलने को मुन्तजिर हो »

वो खुशनुमा चेहरा

वो खुशनुमा चेहरा कितना नूरदार है आज  की रात जैसे फैल गया हो चांद पिघलकर उनके रूखसारों पर »

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Ise Benaam hee Rahne Do

इसे बेनाम ही रहने दो, कोई नाम न दो वर्ना बेवजह दिल में कई सवाल उठेंगें उन सवालों का जबाव हमारे पास नहीं सिर्फ़ अहसास है हमारे पास, जो लफ़्जों में ढलते ही नहीं लफ्जों के सहारे दिल कुछ हल्का कर लेते है गमों के घूंट, एक-दो पी लेते है वर्ना इस दुनिया मे रखा ही क्या है कुछ रखने को आखिर, बचा ही क्या है इन अश्कों को ही आंखो में बचा के रखा है कभी तुम मिल जाओगे इन्हे भी खर्च देंगें हम मिल जाओ तुम अगर, लुट जा... »

इज़हार ए तसव्वुर

  इस वीराने में अचानक बहार कहां से आ गयी गौर से देखा तो ये महज़ इज़हार ए तसव्वुर था »

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