आजाद हिंद के आज आजाद हैं हम,
खुला आसमां है आज हमारे सर पर,
नहीं किसी की हुकूमत है हम पर,
उन्मुक्त गगन के आज आजाद पंछी हैं हम,
श्रेय इसका है उन वीर सपूतों का,
जिन्होंने हैं प्राण गवाए हिंद पर,
महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन का,
जिन्होंने भगा दिया अंग्रेज को,
उनका कर्ज है हमारे सर पर,
हम सारे भूल गए उनके उपकार को,
कुछ तो रहम करो मेरे प्यारो,
याद करो उनकी कुर्बानी को,
जिन्होंने हैं प्राण गवाएं देश पर,
अब तो सब की परी है अपनी,
नहीं देश की चिंता है सर पर,
चाहे जितना भी करो गंदा,
चाहे जितना भी लूटो नोचो,
इघर से लूटो उधर से नोचो,
बस मेरा मेरा की रट लगी है,
क्या कभी सोचा है तुमने ?
आज की आजादी मिली है कैसे ?
होश में आओ मेरे वतन के लोगों,
होश में आओ मेरे वतन के लोगों |