Author: Abhishek Arya

  • आओ कर दे हम आजादी भगत सिंह के नाम |

    अंग्रेज रूपी कंश हेतु वह तो कृष्ण कलेवर था ,
    करतूश को भोजन माना फंशी को जेवर था ,
    वतन के लिये डर न पाया जेल की काली रातो से,
    उसका वर्णन करू मैं कैसे कलम की अपनी बातो से ,
    दे दी हमें आजादी लेकर खुद पर वो अंजाम ,
    आओ कर दे हम आजादी भगत सिंह के नाम |

  • ||देखो क्या है हालत मेरे हिन्दूस्तान की ||

    किस्मत हमारी लटक रही है जैसे पाव में पायल ,
    भारत माँ विलख रही है जैसे दीन-दुखी घायल ,
    जिस आँचल में पले- बढे उसमे बम- गोले फुट रहे है ,
    एक सिरे से खुद बेटा दूसरे से दुश्मन लूट रहे है ,
    रूह काँप उठता है देखकर हालत वर्तमान की ,
    देखो क्या है हालत विधाता मेरे हिन्दूस्तान की|
    जहा सोने की चिड़िया रहती वो भारत मेरा बगीचा था ,
    जिसको खुद ‘बिस्मिल’ ने अपने खुनो से सिंचा था ,
    जिसने भारत माँ की सेवा में कुर्बान किया जवानी को ,
    उसकी अम्मा क्यों तड़प रही आज बून्द-बून्द पानी को ,
    जनता भटक रही है खोज में रास्ता इससे निदान की ,
    देखो क्या है हालत विधाता मेरे हिन्दूस्तान की||
    जो कल तक वादा कर रहे थे हम लिखेंगे तक़दीर ,
    वो आज संसद जाते ही हरने लगे संविधान की चिर ,
    जिसको अपना रक्षक समझकर बनाये वजीर ,
    वो आजादी जागीर समझ कर फ़ेंक रहे वीरों की तस्वीर,
    अखबारों में छप के रह जाती कथा वीरो की वलिदान की,
    देखो क्या है हालत विधाता मेरे हिन्दूस्तान की||
    ©अभिषेक आर्य

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