साथ चलते हैं। चल साथ चलते हैं। मंज़िल की छोड़ ना!! इस बार हम राह चुनते हैं। गुज़रते जायेंगे लम्हें हर लम्हों को कहीं किसी भी तरह क़ैद करते है चल! साथ चलते हैं। […]

“कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं” मैं चाँद नहीं वो प्रचलित तारा ध्रुव भी नहीं मेरे दिखने का कोई दिन नहीं पूर्णिमा नहीं अमावस्या भी नहीं मैं कई प्रकाश वर्ष दूर आकाश का तारा हूँ […]

  सो जाते हैं हम अधूरेपन की थपकी उधेड़बुन वाली लोरी कल परसों की सिसकी और किसी दी हुई हिचकी लिए सो जाते हैं हम सपनों की तकिया सुकून की रजाइयाँ अनजान से सन्नाटे और […]

  पूर्व की हवाएँ जब भी बदलता है मौसम वसंत के बादऔर ग्रीष्म के पहले का लंबा अंतराल तो सूर्य के विरुद्ध जा कर पुरबवैयाँ चलती हैं। गाँव में कहावत है ऐसे मौसम में मत […]

ज़िन्दगी गरम तवे सी हो रखी है। ऐसा-वैसा तवा नहीं। महीने भर खर्चों की आग में  सुलगता तवा!! गरम तवे को राहत देने महीने भर कोई न आता है। महीने के अंत में दफ्तर से […]