An Ordinary Artist's Posts

इंक़लाब

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- »

इंक़लाब

ये मेरे देश के वीरों का लहु जो बहाया है ये दर्द अब और ना सह पायेंगे बात जिस भाषा में समझते हो तुम बात उस भाषा में तुमको समझायेंगे तुमने सोचा भी कैसे, हम कुछ ना करेंगे ज़ुल्म झेला बहुत था पर अब ना सहेंगे तुम्हारी हर ईंट का, पत्थर से जवाब होगा बहुत सह लिया तुमको, अब इंक़लाब होगा क़ुर्बानी उन वीर जवानो की बेकार नहीं होगी जो नुक़सान किया तुमने उसकी भरपाई होगी बलिदान उन वीर जवानो का बर्बाद नहीं होगा बह... »

बात इक शुरुआत

आओ ना चलो, बात करते है, ये खामोशी तुम्हारी जान ही ना लेले आओ ना चलो, बात करते है एक अरसा हुआ तुमको देखे हुए, आओ ना चलो, मुलाकात करते है, आओ ना चलो, बात करते है, बाते दिल की तुम करना, मैं दिल से सुनूँगा, राज दिल के तुम कहना, मैं राज ही रखूँगा, क्यू ना आज ओर अभी से शुरूवात करते है आओ ना चलो, बात करते है, बात करने से ही, बात बन जाती है चोट पत्थर सी हो,तो भी पिघल जाती है, फिर भी ना जाने क्यू,बात से डर... »

एहसास-ए-मोहब्बत

कभी उनको भी मेरी कमी सताती तो होगी अपने दिल में मेरे ख़्वाब सजाते तो होंगे वो जो हर वक़्त बसे हैं ख़्यालों में मेरे कभी मेरी यादों में वो भी खो जाते तो होंगे वो जिनकी राहों में हमेशा पलकें बिछीं रहती हैं मेरी कभी मुझे भी अपने पास बुलाते तो होंगे वो जो शामिल हैं मेरे हर गीत और नग़मों में कभी तन्हाई में मुझे भी गुनगुनाते तो होंगे मैं जिनसे इज़हार-ऐ-मोहब्बत हरपल करना चाहूँ कभी इकरार-ऐ-मोहब्बत वो भी क... »

खिलौने वाला

जी, खिलौने वाला हूँ मैं, खिलौने बेंचता हूँ गुड़िया,हाथी,घोड़े,और ग़ुब्बारे बेंचता हूँ मुझे बचपन की यादों का सौदागर ना समझना चंद ज़रूरतों की ख़ातिर तमाम ख़ुशियाँ बेंचता हूँ पर अपने ख़ुद के बच्चों को खिलौने नहीं दिला पाता बर्फ़ का गोला, ठेलें की चाट नहीं खिला पाता बहरहाल,बच्चें समझदार हैं मेरे, मेरी मजबूरी समझ लेते हैं गूँधे आटे से चिड़ियाँ बना के जों दूँ, उसको ही खिलौना समझ लेते हैं मेरे संग साइकल ... »

बचपन की यादों से नोक झोंक

चाशनी सी मीठी है ये बचपन की यादें ये अक्सर लिपट जाती है सीने से आके और खिलखिला के पूछती है की ऐसा क्या पाया ? मुझको खोकर भी ख़ुद को ना पाया, तो क्या कमाया? बहुत जल्दी थी ना तुमको बड़े होने की ? पैसा कमाने की,ख़ुद के पैरों पर खड़े होने की? तो फिर क्यूँ आज भी सिर्फ़ मुझको ही याद करते हो ? काश मैं लौट आऊँ बस यही फ़रियाद करते हो अफ़सोस, बीता वक़्त कभी लौट के नहीं आता अब इस सच्चाई के कड़वे घूँट पीना सी... »

आत्महत्या या हत्या ?

एक खरोंच भी लगे तो दर्द होता है तो कैसे उसने ख़ुद अपनी जान ली होगी नक़ाब के पीछे छिपे है चेहरे कई मिलके उन काफ़िरों ने साज़िश की होगी उसकी मुस्कान बताती है कितना ज़िंदादिल था वो उन रहीसो से कहीं ज़्यादा क़ाबिल था वो वो मेहनत कर रहा था वो आगे बढ़ रहा था अपनी क़ाबिलियत से सबके दिल में बस रहा था बस यही बात तो उनको गँवारा ना हुई शुरू रास्ते से हटाने की तैयारी हुई उसके जैसे कई और आते रहेंगे, तुम किस कि... »