ये मेरे देश के वीरों का लहु जो बहाया है ये दर्द अब और ना सह पायेंगे बात जिस भाषा में समझते हो तुम बात उस भाषा में तुमको समझायेंगे तुमने सोचा भी कैसे, हम […]

आओ ना चलो, बात करते है, ये खामोशी तुम्हारी जान ही ना लेले आओ ना चलो, बात करते है एक अरसा हुआ तुमको देखे हुए, आओ ना चलो, मुलाकात करते है, आओ ना चलो, बात […]

कभी उनको भी मेरी कमी सताती तो होगी अपने दिल में मेरे ख़्वाब सजाते तो होंगे वो जो हर वक़्त बसे हैं ख़्यालों में मेरे कभी मेरी यादों में वो भी खो जाते तो होंगे […]

जी, खिलौने वाला हूँ मैं, खिलौने बेंचता हूँ गुड़िया,हाथी,घोड़े,और ग़ुब्बारे बेंचता हूँ मुझे बचपन की यादों का सौदागर ना समझना चंद ज़रूरतों की ख़ातिर तमाम ख़ुशियाँ बेंचता हूँ पर अपने ख़ुद के बच्चों को खिलौने […]

चाशनी सी मीठी है ये बचपन की यादें ये अक्सर लिपट जाती है सीने से आके और खिलखिला के पूछती है की ऐसा क्या पाया ? मुझको खोकर भी ख़ुद को ना पाया, तो क्या […]

एक खरोंच भी लगे तो दर्द होता है तो कैसे उसने ख़ुद अपनी जान ली होगी नक़ाब के पीछे छिपे है चेहरे कई मिलके उन काफ़िरों ने साज़िश की होगी उसकी मुस्कान बताती है कितना […]