स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:-

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:-

ये मेरे देश के वीरों का लहु जो बहाया है
ये दर्द अब और ना सह पायेंगे
बात जिस भाषा में समझते हो तुम
बात उस भाषा में तुमको समझायेंगे
तुमने सोचा भी कैसे, हम कुछ ना करेंगे
ज़ुल्म झेला बहुत था पर अब ना सहेंगे
तुम्हारी हर ईंट का, पत्थर से जवाब होगा
बहुत सह लिया तुमको, अब इंक़लाब होगा
क़ुर्बानी उन वीर जवानो की बेकार नहीं होगी
जो नुक़सान किया तुमने उसकी भरपाई होगी
बलिदान उन वीर जवानो का बर्बाद नहीं होगा
बहुत सह लिया तुमको, अब इंक़लाब होगा
1962 में भी तुमने ख़ंजर इक घौपा था
फिर भी हमने भाई-भाई का बीज ही रोपा था
पर दोगलापन ये तुम्हारा और बर्दाश्त नी होगा
बहुत सह लिया तुमको, अब इंक़लाब होगा
अब इंक़लाब होगा, अब इंक़लाब होगा
#china ko jawaab
✍️ Rinku Chawla 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
आओ ना चलो, बात करते है,
ये खामोशी तुम्हारी जान ही ना लेले
आओ ना चलो, बात करते है
एक अरसा हुआ तुमको देखे हुए,
आओ ना चलो, मुलाकात करते है,
आओ ना चलो, बात करते है,
बाते दिल की तुम करना, मैं दिल से सुनूँगा,
राज दिल के तुम कहना, मैं राज ही रखूँगा,
क्यू ना आज ओर अभी से शुरूवात करते है
आओ ना चलो, बात करते है,
बात करने से ही, बात बन जाती है
चोट पत्थर सी हो,तो भी पिघल जाती है,
फिर भी ना जाने क्यू,बात से डरते है
आओ ना चलो, बात करते है
आओ ना चलो, बात करते है
✍️ Rinku Chawla
#shushantsingh incident
कभी उनको भी मेरी कमी सताती तो होगी
अपने दिल में मेरे ख़्वाब सजाते तो होंगे
वो जो हर वक़्त बसे हैं ख़्यालों में मेरे
कभी मेरी यादों में वो भी खो जाते तो होंगे
वो जिनकी राहों में हमेशा पलकें बिछीं रहती हैं मेरी
कभी मुझे भी अपने पास बुलाते तो होंगे
वो जो शामिल हैं मेरे हर गीत और नग़मों में
कभी तन्हाई में मुझे भी गुनगुनाते तो होंगे
मैं जिनसे इज़हार-ऐ-मोहब्बत हरपल करना चाहूँ
कभी इकरार-ऐ-मोहब्बत वो भी करना चाहते तो होंगे
जिनके लिए मेरी रात कटती है करवट बदलते-बदलते
कभी उनको भी सपने मेरे सताते तो होंगे
ये ग़म,आँसू,तकलीफ़ सिर्फ़ मेरे ही नसीब में नहीं
मुझसे जुदाई के आँसू उनको भी रूलाते तो होंगे
कभी उनको भी मेरी कमी सताती तो होगी
अपने दिल में मेरे ख़्वाब सजाते तो होंगे
✍️Rinku Chawla
जी, खिलौने वाला हूँ मैं, खिलौने बेंचता हूँ
गुड़िया,हाथी,घोड़े,और ग़ुब्बारे बेंचता हूँ
मुझे बचपन की यादों का सौदागर ना समझना
चंद ज़रूरतों की ख़ातिर तमाम ख़ुशियाँ बेंचता हूँ
पर अपने ख़ुद के बच्चों को खिलौने नहीं दिला पाता
बर्फ़ का गोला, ठेलें की चाट नहीं खिला पाता
बहरहाल,बच्चें समझदार हैं मेरे, मेरी मजबूरी समझ लेते हैं
गूँधे आटे से चिड़ियाँ बना के जों दूँ, उसको ही खिलौना समझ लेते हैं
मेरे संग साइकल की सवारी उन्हें कार सी लगतीं है
ज़िंदगी ग़म में अभिशाप तो ख़ुशी में उपहार सी लगती है
देखा है मैंने, पैसे वालों के बड़े घरों में तकरार बहुत है,
अपना तो छोटा सा आशियाना है, पर प्यार बहुत है,
पर प्यार बहुत है ❤️
✍️ Rinku Chawla
चाशनी सी मीठी है ये बचपन की यादें
ये अक्सर लिपट जाती है सीने से आके
और खिलखिला के पूछती है की ऐसा क्या पाया ?
मुझको खोकर भी ख़ुद को ना पाया, तो क्या कमाया?
बहुत जल्दी थी ना तुमको बड़े होने की ?
पैसा कमाने की,ख़ुद के पैरों पर खड़े होने की?
तो फिर क्यूँ आज भी सिर्फ़ मुझको ही याद करते हो ?
काश मैं लौट आऊँ बस यही फ़रियाद करते हो
अफ़सोस, बीता वक़्त कभी लौट के नहीं आता
अब इस सच्चाई के कड़वे घूँट पीना सीखों
आने वाले कल को छोड़ो, आज में जीना सीखों !
वरना ये पल भी हाथ से फिसल जाएगा
थोड़ा और की चाहत में, जो है वो भी निकल जाएगा
अब इस सच्चाई के कड़वे घूँट पीना सीखों
आने वाले कल को छोड़ो, आज में जीना सीखों !
✍️Rinku Chawla
एक खरोंच भी लगे तो दर्द होता है
तो कैसे उसने ख़ुद अपनी जान ली होगी
नक़ाब के पीछे छिपे है चेहरे कई
मिलके उन काफ़िरों ने साज़िश की होगी
उसकी मुस्कान बताती है कितना ज़िंदादिल था वो
उन रहीसो से कहीं ज़्यादा क़ाबिल था वो
वो मेहनत कर रहा था वो आगे बढ़ रहा था
अपनी क़ाबिलियत से सबके दिल में बस रहा था
बस यही बात तो उनको गँवारा ना हुई
शुरू रास्ते से हटाने की तैयारी हुई
उसके जैसे कई और आते रहेंगे, तुम किस किस को मिटाओगे ?
ऐ हस्ती मिटाने वालों, हमारे दिल से कैसे मिटाओगे ?
✍️ Rinku Chawla
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