हाय ओ चन्द्रमा ! तू है कितना खूबसूरत , समाई है तुझमें जाने कितने हज़ारों की मूरत। रौशनी तेरी जगती है मुझे सारी रात , तेरी इस आभा ने दी है नरलोक को मात। चकोर […]

ऐ कलम ! आज तू बड़े दिन बाद फिर हाथ आयी है, कई दिनों बाद फिर से तेरी ये स्याही इन हाथों में इतराई है। नीली- नीली स्याही के छींटे फिर कागज़ पर पड़े हैं […]