Author: ANIL BACHLE

  • रग रग मे है तू

    गुल है बाग़ मे मगर खुशबू नही है

    जां है बदन मे मगर रूह नही है

    तेरा होना भी इक हादसा है ग़ज़ब का

    कि रग रग मे है तू मगर रूबरू नही है।

  • आइना हूं मैं

    बदलती हुई दुनिया का आइना हूं मैं

    बदलते है चेहरे तो बदल जाता हूं मै

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