रग रग मे है तू

गुल है बाग़ मे मगर खुशबू नही है

जां है बदन मे मगर रूह नही है

तेरा होना भी इक हादसा है ग़ज़ब का

कि रग रग मे है तू मगर रूबरू नही है।

Comments

One response to “रग रग मे है तू”

  1. Ritika bansal Avatar
    Ritika bansal

    Behtareen ji

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