रात भर होंठों पर मुस्कान, भोर से ही सीने में गुलों का खिलना था बात कोई नई न थी, बस इस शाम अपने हमदर्द से मिलना था । ख़ैर,शाम ढ़लने के साथ ही, सौ रूपये […]