Author: Brajesh Kumar

  • जाने कहां वो

    जाने  कहां वो,

    सिलसिले  रह गये,

    कोई शिकवे ना गिले रह गये,

    अब जिंदगी पहुंच गई उस मुकाम पर,

    जहां तुम  तुम  ना रह गये,

    और हम  हम  ना रह गये।

    और हम हम ना रह गये।

  • कोई शिकवा नहीं है

    कभी रुलाया है,

    तो कभी हंसाया भी है,

    जिन्दगी तुझसे कोई शिकवा नहीं है,

    कभी खोया है,

    तो कभी पाया भी है

  • बदल गया है देश

    वो कहते हैं अपनी सरकार आते ही बदल गया है देश, 

    रंग है बदला रूप है बदला और बदल गया परिवेश,

    बेवजह झूठे दावे करने की इनको लगी बीमारी है,

    भुखमरी, भ्रष्टाचार, महंगाई से से कहां मुक्त हो गया देश।

     

    जिज्ञासु

  • कहो तो

    कहो तो दिल की कलम से तुम्हारी तस्वीर बना दूँ,

     कहो तो  मोहब्बत के हसीन रंगों से उसे सजा दूँ,

    और भी कुछ हसरतें बाकी हैं इस शीशा ऐ दिल में, 

    कहो तो इस तस्वीर को ही अपनी तकदीर बना 

    लूँ।

     

     

     

  • फूलों से सीख लो

    फूल से  सीख लो यारों  जीवन  का  फलसफा, 

    कांटों में भी मुस्कुराने का अंदाज बयां करते हैं।                                                     जिज्ञासु 


  • सत्ता के दलाल

    धर्म  बेच देते हैं,

    इमान बेच देते हैं,  

    वतन की इज्जत,

    और सामान बेच देते हैं,

    चंद वोटों की खातिर,

    सत्ता  के  दलाल,

    हिंदू और मुसलमान बेच देते हैं,

    बड़े  बेगैरत  होते हैं,

    ये  सब  जानते  हैं,

    चंद पैसों की खातिर,

    गीता और कुरान बेच देते हैं।

    बी के जिज्ञासु

     

     

     

  • कोई सौदा नहीं होता

    दिलवालों की दुनिया में कोई सौदा नहीं होता,

    प्यार  से  अनमोल  कोई  तोहफा  नहीं  होता,

    दौलत  के  तराजू  में  ना  इसको  तोलो यारों ,

    ये  प्यार  है  कभी   कम – ज्यादा  नहीं  होता।

    जिज्ञासु

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