ना किसी के इनतेज़ार मे ना किसी के इंतज़ार की पुकार में ना समुद्र के किनार पे ना जी में , ना हार में ना मंज़िल की आड़ में ना प्यार में , ना उसके […]

मुझे कहना हैं अभी वो शब्द जिसे कह कर मैं नि: शब्द हो जाऊ मुझे देना हैं अभी वो शब्द जिसे देकर मैं नि: शेष हो जाऊ मुझे रहना है अभी इस तरह के मैं […]

आसमान से धरती पर उस पानी का गिरना आशाएँ , उम्मीदें जगाकर उस टूटते तारे का गिरना लहराकर उचाई से उस झरने का गिरना न चाहते हुए भी किसी का प्यार में गिरना या फिर […]

इस देश में अजीब किस्म की बात चल रही है, हिन्दू , मुस्लिम ,सिख ,ईसाई कहने को है सब भाई-भाई ख़ास तौर पर हिन्दू और मुस्लिमान इस कविता में न कोई ऐसा नाम हैं जो […]