दो दिन की ज़िन्दगी

रोज़ लगता हैं , जैसे कुछ छूट गया हो
करने को कुछ रह गया हो
शायद दो दिन की ज़िन्दगी में ,
इसलिए दूसरा दिन होता हैं

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