रंग ‘लाल’ का एहसास तेरे ‘लाल’ को है क्यूँ नहीं… बनता मज़ाक़ मेरा ही क्यूँ , क्या घर में रहती तू नहीं… ना मंदिर मस्जिद जा सकूँ ना गुरुद्वारे इन दिनो रब ने बनाया है […]