*ओ बाबुजी…* बहुत याद आते हो ओ बाबूजी दिल को रुलाते हो ओ बाबुजी ।। जीना तुम्हारे बिन गवारा नहीं धड़कते हो सीने में ओ बाबुजी।। अंधेरी है दुनिया अंधेरी है राहें अंधेरी है खुशियां […]

एक नई कविता”अंग्रेजी न्यू ईयर”के आगमन पर …समर्पित (डा0दिलीप गुप्ता,घरघोड़ा.रायगढ़.छ0ग0) 0 **स्वागत हे नव वर्ष क्या लेकर आए हो.. विषाद की बोरियां या बिंडलों मे हर्ष !! या ओढ़कर भेंड़ की खाल आये हो !! […]