Deovrat Sharma, Author at Saavan's Posts

चंद बातें

••• जब सुनता हूँ कभी दिल की ज़ेहन ये कहता है संभल कमबख़्त किस उलझन में तू उलझा रहता है शाम ढले सर्द हवा कुछ सहमी सी ख़ामोश फ़िज़ा। शब-ए-तन्हाई में दिल पर कुहासा रहता है।। क़ब्ल में कब हुई गुफ़्तगू उससे कुछ याद नही। वो अब भी मुझसे न जाने क्यूँ खफ़ा सा रहता है।। क़ायम कब तलक रहेंगे सिलसिले अदावत के। यक़ीनन आएगा वो लौट कर दिल ये मेरा कहता है।। ••• @deovrat 08.10.2019 »

रिवायत

••• अज़ब दुनिया गज़ब ज़माना है। ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराना है।। आँधी में टूट कर जो बिखरे हैं। उन घरोंदों को फिर सजाना है।। क़ब्ल में दफ़्न कर दिया जिसको। फिर उस उम्मीद को जगाना है।। रिश्ते जो जाने क्यूँ बिखर से गए। बिगडे रिश्तों को फिर बनाना है।। अज़ब दुनिया गज़ब ज़माना है। ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराना है।। ••• @deovrat 02.10.2019 क़ब्ल=पहले से »

अपनापन

••• किये जिस पे भी तुमने तंज़ वो सब तुम्हारे हैं। रंज जिस से भी करोगे वो सब तुम्हारे हैं।। रूबरू लौट कर आयेंगे वो जानिब को तेरी। अज़ल से बहते हुए दरिया के सभी धारे हैं।। ••• @deovrat 30.09.2019 »

वक़्त

••• दामन-ए-वक़्त में हर ग़म को छुपाना होगा। वरना तमाम उम्र यूँ ही अश्क़ बहाना होगा।। जहान में कौन अज़ल तक रहा सलामत है। आख़िर सभी को दुनियाँ छोड़ के जाना होगा।। ख्वाहिश-ए-सुबू किस का हुआ लबरेज़ यहाँ। बाद मरने के तो ख़लाओं में ठिकाना होगा।। ख़ुद की परछायी पे आइनों को रश्क करने दो। बिखरते ख़्वाबों को हक़ीकत तो बनाना होगा।। दामन-ए-वक़्त में हर ग़म को छुपाना होगा। वरना तमाम उम्र यूँ ही अश्क़ बहाना होग... »

Politeness

••• sometimes arrogance don’t need to be explained through words It maybe expressed through actions by the arrogant personalities however submissiveness always prevails over arrogant behavior so the one in possession of authorits needs to be submissive in actions too ••• ©deovrat 22.09.2019 »

Identity

••• name and fame of individuals doesn’t matter what simply matters understanding of self responsibilities clarity of actions commitment to deliver and act to perform ••• ©deovrat 21.09.2019 »

Relationship

••• someone perception that relation can be grown through love and emotion no… none… they govern and depends upon individuals intention ••• ©deovrat 19.09.2019 »

Acceptance

*** no autocratic leadership can survive for a longer time. in a democratic setup every citizen is having equal rights and responsibilities. autocratic behaviour of individuals is not acceptable, whether he is elected or selected or a common civilian. *** ©deovrat 17.09.2019 »

दोस्ती

दोस्ती

*** दोस्ती हो तो ऐसी कि उसके मुक़ाबिल पुश्तैनी दुश्मनी भी फ़ीकी पड़ जाये…. दोस्त के बिना रहा न जाये अगर दोस्त मिल जाए तो कुछ और न भाये…. **** @deovrat 15.09.2019 »

मातृभाषा

*** पतित पावनी हरित धरा पर जिस दिन से आँखें खोली हैं। कानों में शहद घोलती सी ये अपनी मातृभाषा की बोली है।। बचपन में वो अध्यापक जी जब श्याम पटल पर लिखते थे। कुछ लम्बे पतले गोल मोल कितने अनजाने अक्षर दिखते थे।। निज माता-पिता, बंधु भ्राता मिल राह सभी ने दिखलाई। शैशव की बातों के दम पर हमने जीवन की बाज़ी खेली है।। खो चुके हैं अब तक समय व्यर्थ, दो जीवन को अब नया अर्थ। निज भाषा का सम्मान करो ये प्रगति पथ... »

Mistrust

Mistrust

••• only a small poisonous drop of misunderstandings and egoism may lead within a jiffy split second into perishable circumstance to a delicate tree of beautiful healthy relationship which was grown up in the past years by nurturing with the nectar-like water of mutual belief love and affection ••• ©deovrat 04.08.2019 »

Life Cycle

… I rouse from the lap of ocean.. rose up down now and than… ~~~ flew on on the wings of clouds.. walk play and commit many fouls… ~~~ collide with the mighty mountains.. feeling cavalier without any pain… ~~~ a sudden my tears rushing down on cheeks… flowing on peek valley n creeks…. ~~~ unconscious unaware and shy.. unable to rise unable to fly…. ~~~ rus... »

एकल प्रणय

तुमने स्वीकार किया ना किया.. मैने तो अपना मान लिया ! प्रिय मन में मुझे बसाना था.. तुम भ्रांति ह्रदय में बसा बैठी !! ~~~ प्रिय स्नेह निमन्त्रण दिया तुम्हे.. तुमने क्यूँ उसको टाल दिया ! मेरे अरमानों की पुष्प लता को.. यूँ ही किनारे डाल दिया !! ~~~ मैं स्वयम् ही अपना दोषी हूँ.. इक तरफ़ा तुमसे प्यार किया ! ­ ना कुछ सोचा, ना समझा कुछ.. बस जा तुमसे इज़हार किया !! ~~~ वो एकल प्रणय निवेदन ही.. कर गया मेरे ... »

मिलन

तुमसे मिलने की ललक.. मेरी इन साँसों को ! एक उम्मीद-औ-आशा की झलक दे जाती है !! तेरी बस एक झलक.. उम्मीदों के तप्त मरुस्थल में ! उमंगों की बहार.. अनेकों पुष्प खिला जाती है !! यूँ तो तुम बसते हो.. मेरे कण कण में ! तेरे दीदार की ख्वाहिश.. नयी प्यास जगा जाती है !! राज़-ए-दिल तुझसे.. भला कौन छुपा पाया है ! दिल की हर धड़कन.. तेरा अहसास करा जाती है !! बेख्यालि में भी.. ख्यालों में सूरत तेरी है ! सांसो की त... »

Writing

I wish to say some thing i wish to say many thing Something interesting something boring To whom i reveal to whom i believe till what time i keep mum how much i bear within So much ambiguity immense pain i find the only way keeping me restrained Still i write, so many constrain writing something, phrases in vain unable to describe why to be but the only way Consoling to me ******** deovrat –... »

Untamed Desire

Often I wonder why.. Try to look beyond the sky… Far far too far…… Till ocean meets to the sky.. Although my vision.. gets faded… My desire to see.. beyond the horizon added… More and more I try…. I wonder why… ******* deovrat – 12.02.2014 »

सुकून

जब न था इश्क दर्दे-ए-दिल न था! जब से उनसे उलझी नज़रें बेकली सी  हो गयी!! *********                     इब्दिता-ए-इश्क में..               उनके उठाए नाज़-ओ-खम!                      अब ना जाने अपनी फ़ितरत…                       बेवफा सी हो गयी!!                      ********* चन्द लम्हे साथ था वो फिर हो गया नज़रों से दूर! उनके दिल से अपने दिल की गुफ्तगू तो हो गयी!! *********                  व... »