Deovrat Sharma, Author at Saavan's Posts

रिवायत

••• अज़ब दुनिया गज़ब ज़माना है। ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराना है।। आँधी में टूट कर जो बिखरे हैं। उन घरोंदों को फिर सजाना है।। क़ब्ल में दफ़्न कर दिया जिसको। फिर उस उम्मीद को जगाना है।। रिश्ते जो जाने क्यूँ बिखर से गए। बिगडे रिश्तों को फिर बनाना है।। अज़ब दुनिया गज़ब ज़माना है। ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराना है।। ••• @deovrat 02.10.2019 क़ब्ल=पहले से »

अपनापन

••• किये जिस पे भी तुमने तंज़ वो सब तुम्हारे हैं। रंज जिस से भी करोगे वो सब तुम्हारे हैं।। रूबरू लौट कर आयेंगे वो जानिब को तेरी। अज़ल से बहते हुए दरिया के सभी धारे हैं।। ••• @deovrat 30.09.2019 »

वक़्त

••• दामन-ए-वक़्त में हर ग़म को छुपाना होगा। वरना तमाम उम्र यूँ ही अश्क़ बहाना होगा।। जहान में कौन अज़ल तक रहा सलामत है। आख़िर सभी को दुनियाँ छोड़ के जाना होगा।। ख्वाहिश-ए-सुबू किस का हुआ लबरेज़ यहाँ। बाद मरने के तो ख़लाओं में ठिकाना होगा।। ख़ुद की परछायी पे आइनों को रश्क करने दो। बिखरते ख़्वाबों को हक़ीकत तो बनाना होगा।। दामन-ए-वक़्त में हर ग़म को छुपाना होगा। वरना तमाम उम्र यूँ ही अश्क़ बहाना होग... »

Politeness

••• sometimes arrogance don’t need to be explained through words It maybe expressed through actions by the arrogant personalities however submissiveness always prevails over arrogant behavior so the one in possession of authorits needs to be submissive in actions too ••• ©deovrat 22.09.2019 »

Identity

••• name and fame of individuals doesn’t matter what simply matters understanding of self responsibilities clarity of actions commitment to deliver and act to perform ••• ©deovrat 21.09.2019 »

Relationship

••• someone perception that relation can be grown through love and emotion no… none… they govern and depends upon individuals intention ••• ©deovrat 19.09.2019 »

Acceptance

*** no autocratic leadership can survive for a longer time. in a democratic setup every citizen is having equal rights and responsibilities. autocratic behaviour of individuals is not acceptable, whether he is elected or selected or a common civilian. *** ©deovrat 17.09.2019 »

दोस्ती

दोस्ती

*** दोस्ती हो तो ऐसी कि उसके मुक़ाबिल पुश्तैनी दुश्मनी भी फ़ीकी पड़ जाये…. दोस्त के बिना रहा न जाये अगर दोस्त मिल जाए तो कुछ और न भाये…. **** @deovrat 15.09.2019 »

मातृभाषा

*** पतित पावनी हरित धरा पर जिस दिन से आँखें खोली हैं। कानों में शहद घोलती सी ये अपनी मातृभाषा की बोली है।। बचपन में वो अध्यापक जी जब श्याम पटल पर लिखते थे। कुछ लम्बे पतले गोल मोल कितने अनजाने अक्षर दिखते थे।। निज माता-पिता, बंधु भ्राता मिल राह सभी ने दिखलाई। शैशव की बातों के दम पर हमने जीवन की बाज़ी खेली है।। खो चुके हैं अब तक समय व्यर्थ, दो जीवन को अब नया अर्थ। निज भाषा का सम्मान करो ये प्रगति पथ... »

Mistrust

Mistrust

••• only a small poisonous drop of misunderstandings and egoism may lead within a jiffy split second into perishable circumstance to a delicate tree of beautiful healthy relationship which was grown up in the past years by nurturing with the nectar-like water of mutual belief love and affection ••• ©deovrat 04.08.2019 »

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