••• जब सुनता हूँ कभी दिल की ज़ेहन ये कहता है संभल कमबख़्त किस उलझन में तू उलझा रहता है शाम ढले सर्द हवा कुछ सहमी सी ख़ामोश फ़िज़ा। शब-ए-तन्हाई में दिल पर कुहासा रहता […]

••• अज़ब दुनिया गज़ब ज़माना है। ज़ख्म खा कर भी मुस्कुराना है।। आँधी में टूट कर जो बिखरे हैं। उन घरोंदों को फिर सजाना है।। क़ब्ल में दफ़्न कर दिया जिसको। फिर उस उम्मीद को […]

••• किये जिस पे भी तुमने तंज़ वो सब तुम्हारे हैं। रंज जिस से भी करोगे वो सब तुम्हारे हैं।। रूबरू लौट कर आयेंगे वो जानिब को तेरी। अज़ल से बहते हुए दरिया के सभी […]

••• दामन-ए-वक़्त में हर ग़म को छुपाना होगा। वरना तमाम उम्र यूँ ही अश्क़ बहाना होगा।। जहान में कौन अज़ल तक रहा सलामत है। आख़िर सभी को दुनियाँ छोड़ के जाना होगा।। ख्वाहिश-ए-सुबू किस का […]

••• sometimes arrogance don’t need to be explained through words It maybe expressed through actions by the arrogant personalities however submissiveness always prevails over arrogant behavior so the one in possession of authorits needs to […]

••• name and fame of individuals doesn’t matter what simply matters understanding of self responsibilities clarity of actions commitment to deliver and act to perform ••• ©deovrat 21.09.2019

*** no autocratic leadership can survive for a longer time. in a democratic setup every citizen is having equal rights and responsibilities. autocratic behaviour of individuals is not acceptable, whether he is elected or selected […]

*** दोस्ती हो तो ऐसी कि उसके मुक़ाबिल पुश्तैनी दुश्मनी भी फ़ीकी पड़ जाये…. दोस्त के बिना रहा न जाये अगर दोस्त मिल जाए तो कुछ और न भाये…. **** @deovrat 15.09.2019

*** पतित पावनी हरित धरा पर जिस दिन से आँखें खोली हैं। कानों में शहद घोलती सी ये अपनी मातृभाषा की बोली है।। बचपन में वो अध्यापक जी जब श्याम पटल पर लिखते थे। कुछ […]

••• only a small poisonous drop of misunderstandings and egoism may lead within a jiffy split second into perishable circumstance to a delicate tree of beautiful healthy relationship which was grown up in the past […]

तुमने स्वीकार किया ना किया.. मैने तो अपना मान लिया ! प्रिय मन में मुझे बसाना था.. तुम भ्रांति ह्रदय में बसा बैठी !! ~~~ प्रिय स्नेह निमन्त्रण दिया तुम्हे.. तुमने क्यूँ उसको टाल दिया […]

तुमसे मिलने की ललक.. मेरी इन साँसों को ! एक उम्मीद-औ-आशा की झलक दे जाती है !! तेरी बस एक झलक.. उम्मीदों के तप्त मरुस्थल में ! उमंगों की बहार.. अनेकों पुष्प खिला जाती है […]

जब न था इश्क दर्दे-ए-दिल न था! जब से उनसे उलझी नज़रें बेकली सी  हो गयी!! *********                     इब्दिता-ए-इश्क में..               उनके उठाए नाज़-ओ-खम!                      अब ना जाने अपनी फ़ितरत…                       बेवफा सी हो गयी!! […]