वह आईना मुझसे कितना कुछ कहता हैं, रोज़ सवेरे वह मेरे दिदार को तरसता हैं। मुस्कुराऊँ जो मैं उसे देखकर, वह फिर मुस्कुराता है। सवारु जो मैं खुद को उसके सामने, वह भी होले से […]