Himanshu, Author at Saavan's Posts

गाथा आजादी की

गाथा आजादी की

लहू के हरेक बूँद से लिखी हुई कहानी है I मेरे हिन्द की आजादी की गाथा जरा निराली है II विश्वास की नदियाँ यहा, निश्छल सा प्यार था कभी रहते खुशी से सब यहा, न द्वेष लेशमात्र भी कुछ धूर्त आ गए यहा, कपटी दोस्त की तरह इस देश को बेच दिया, हृदय हीन गुलामो की तरह कैद कर दिया हमें अपने ही परिवेश में कुंठित हुआ है जन जन ,देखो आज इस तरह जिस्म पे हुए हरेक जुल्म की निशानी है I मेरे हिन्द की आजादी की गाथा जरा निरा... »

पत्र

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ये लहू कह रहा है कि भूल न जाना, न हम कर सके जो वो करके दिखाना, हम मिटे सरहदो पे कोई गम हमें नहीं इस हिन्द की आजादी का , न कोई मोल तुम लगाना कण कण समेट हम धरा से,एक अडिग शैल बन जाएंगे तुम छू सको हर कोर को, एेसा स्वतंत्र नभ दे जाएंगे कभी शूल जो बिखरे हुए हो मुश्किलों के वतन पे, इस देह में उनको समा, कहीं तिरंगे में लिपट जाएंगे I प्रेम का विश्वास का नित दीप तुम जलाना, मेरे हिन्द को विकास के पथ पर तुम ... »

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ये लहू कह रहा है कि भूल न जाना, न हम कर सके जो वो करके दिखाना, हम मिटे सरहदो, पे कोई गम हमें नहीं इस हिन्द की आजादी का , न कोई मोल तुम लगाना I कण कण समेट हम धरा से,एक अडिग शैल बन जाएंगे तुम छू सको हर कोर को, एेसा स्वतंत्र नभ दे जाएंगे कभी शूल जो बिखरे हुए हो मुश्किलों के वतन पे, इस देह में उनको समा, कहीं तिरंगे में लिपट जाएंगे I प्रेम का विश्वास का नित दीप तुम जलाना, मेरे हिन्द को विकास के पथ पर त... »

भारतमाता

स्वर्णिम ओज सिर मुकुट धारणी,विभूषित चन्द्र ललाट पर गुंजन करे ये मधुर कल-कल, केशिक हिमाद्रि सवारकर आभामय है मुखमडंल तेरा, स्नेहपू्र्णिता अतंरमन। अभिवादन माँ भारती, मातृभूमि त्वमेव् नमन।। बेल-लताँए विराजित ऐसे, कल्पित है जैसे कुण्डल ओढ दुशाला तुम वन-खलिहन का ,जैसे हरित कोमल मखमल तेरा यह श्रृंगार अतुलनीय, भावविभोर कर बैठे मन। वन्दे तु परिमुग्ध धरित्री, धन्य हे धरा अमूल्यम्।। वाम हस्त तुम खडग धरे, दाह... »

क्या है भारत।

क्या है भारत । एक कल्पना है ये भारत, हरिअर वन-खलिहानो की रहे सूखी जहाँ ये धरती तो उसे भारत नही समझना एक उम्मीद है ये भारत, जो नित् पथ दिखाए जग को बिखरे जो यूँ तूफाँ से तो उसे भारत नहीं समझना एक आवाज है ये भारत,जो मधुर ज्ञान दे जगत को कहीं गुम अगर हो जाए तो उसे भारत नहीं समझना एक विचार है ये भारत, संगठित करे जो जगत को विभाजन अगर जो चाहे तो उसे भारत नहीं समझना एक कर्म है ये भारत, जो जीवन सिखाए जगत क... »

यारी

बेखौफ है हम, देखो इस जहाँ से जो संग मेरे तू है इतमिनान से बीते साये में तेरे ये दिन तुम्हें कह रहा हूँ यारा ईमान से कहीं मुस्कुराहट है बिखेरती ,ये बिमारी मेरी मुश्किलों को आसान कर रही, तेरी यारी अब बिन तेरे दुनिया लगे ये ,न्यारी न्यारी मुझपे चढी है दोस्ती की ये खुमारी कभी रख सके जो, तेरे दिल पे हम कहीं कुछ आहें ये मेरी, कुछ बात अनकही इन बातों को तुम दफन कर लेना उस जगह जहाँ ढूँढ फिर सके ,न तेरे सिव... »

अकेला हिन्दुस्तान

उथल-पुथल जमीं कहीं पे, हो रहा शिथिल अभिमान I प्रतीत तो ये हो रहा, आज अकेला हिन्दुस्तान II यहाँ लुट रही है अस्मिता, पर उनको ये परवाह क्या ? टूट जाए आशियाँ पर, उनके लिए ये बात क्या ? दमन किसी के ख्वाबो का, पल पल हो रहा यहाँ; हनन किसी के साँसो का, हो तो उन्हें परवाह क्या ? उम्मीद थी जिनसे हमे, इन मुश्किलों को सुलझाने में I वो मशगूल है सदा कहीं , एक-दूजे को मनाने में II भँवर में दीन-हीन के, रहा भटक ये... »