पत्र

ये लहू कह रहा है कि भूल न जाना,
न हम कर सके जो वो करके दिखाना,
हम मिटे सरहदो, पे कोई गम हमें नहीं
इस हिन्द की आजादी का , न कोई मोल तुम लगाना I

कण कण समेट हम धरा से,एक अडिग शैल बन जाएंगे
तुम छू सको हर कोर को, एेसा स्वतंत्र नभ दे जाएंगे
कभी शूल जो बिखरे हुए हो मुश्किलों के वतन पे,
इस देह में उनको समा, कहीं तिरंगे में लिपट जाएंगे I

प्रेम का विश्वास का नित दीप तुम जलाना,
मेरे हिन्द को विकास के पथ पर तुम चलाना,
ये कर्तव्य है तेरा सदा सुनो ए नौजवाँ,
पग पग हर एक मोड़ पर तुम इसको निभाना I

Comments

2 responses to “पत्र”

  1. Ritika bansal Avatar
    Ritika bansal

    बेहतरीन …

  2. Satish Pandey

    जयहिंद

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