महामानव जब जब अंधेरा छाता है, कोई बन प्रकाश तब आता है, जिसके आने से सभी दिशाएं करती उसे प्रणाम हैं, वो मानव रूपी राम है। जो अंधकार में दीपक बनकर, तम को हरता है, […]

महामानव जब जब अंधेरा छाता है, कोई बन प्रकाश तब आता है, जिसके आने से सभी दिशाएं करती उसे प्रणाम हैं, वो मानव रूपी राम है। जो अंधकार में दीपक बनकर, तम को हरता है, […]