Author: jitendra

  • माँ

    रूठ जाता हु कभी अगर
    कोई नहीं आता माँ,
    तेरे सिवा मनाने के लिए;
    घाव गहरे है मेरे;
    कोई नहीं आता माँ;
    तेरे सिवा सहलाने के लिए;..
    अक्सर भटक जाता हु मैं;
    कोई नहीं आता माँ;
    तेरे सिवा राह दिखाने के लिए..;
    उदास रहता हु अगर कभी;
    कोई नहीं आता माँ;
    तेरे सिवा हसाने के लिए…
    माँ सिर्फ तू आती है ;
    और कोई नहीं आता,
    मेरे पास खुशियाँ बरसाने के लिए.

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