माँ

रूठ जाता हु कभी अगर
कोई नहीं आता माँ,
तेरे सिवा मनाने के लिए;
घाव गहरे है मेरे;
कोई नहीं आता माँ;
तेरे सिवा सहलाने के लिए;..
अक्सर भटक जाता हु मैं;
कोई नहीं आता माँ;
तेरे सिवा राह दिखाने के लिए..;
उदास रहता हु अगर कभी;
कोई नहीं आता माँ;
तेरे सिवा हसाने के लिए…
माँ सिर्फ तू आती है ;
और कोई नहीं आता,
मेरे पास खुशियाँ बरसाने के लिए.

Comments

2 responses to “माँ”

  1. Chandra Prakash Avatar
    Chandra Prakash

    बहुत खूब जी

  2. Satish Pandey

    वाह जी वाह

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