Jitendra Shukla's Posts

मोर नजर

तै कहूँ जा मोर आँखि के आघू म रैबे भले तोला लागहि कोनो नई देखत हे पर तय का जानिबे मोर नजरे नजर म झूलत रथस कभू मोर पीठ म छुरा झन घोपबे प्रेम म कैबे त अपन जीव दे दह अउ सीना जोरी करबे त जी ले लह काबर कि तै मोर आँखि के आघू म हस सबे दिन मोर नजर म हस »