Author: Jiya

  • बरसात: मन की रंगीन धारा

    बादलों की छाँव में आयी बरसात,
    धरती ने पहनी हरियाली की साड़ी।
    गीत गाती हुई हवाएं मुझको बुलाती,
    मन को भर देती खुशियों की बरसाती।

    बूँदों की छपछपाहट में झूम उठा जहां,
    पत्तों की खुशबू से महक उठा जहां।
    मिट्टी की गर्मी बह गई बरसात में,
    जीवन को नई उमंगों से भर दिया।

    मन में छायी हर बूंद की सपनों की धारा,
    फूलों की मेहक ने बनाया नया नगारा।
    प्यार की बूंदें गिरीं दिलों के उपवन में,
    आँखों में बस गई खुशियों की झरनी।

    प्यारी बरसात, तू कहाँ से आई है,
    आँगन को रंगीन और हृदय को भर दिया।
    धरा को चुमकीला, हरा-भरा बना दिया,
    बरसात की मौसम ने आँखों को बहा दिया।

    जल की मनमोहकता चारों ओर फैली है,
    हर दिल को अपनी खुशबू से भर दिया।
    गीतों की धुन में मन ने नाचना सीखा है,
    बरसात के रंगों में जीवन को सजा दिया।

New Report

Close