खेतों के सब बीज शज़र हो जाते हैं सरहद पर वीर अमर हो जाते हैं तुम वर्दी पहने मिट्टी साने क्या बतलाते हो हम भी इनके जैसे हैं ये दिखलाते हो, सीखो जरा लाल अटल […]

अम्मा, एक बात कहूं ये जो तुम बकरी भैस गोबर घास में लगी रहती हो न अच्छा है, तुम अकेली तो नही बाबू की अलग सुनने की आदत, तुम्हारी थकान, तुम जो आकर शाम को […]

पहली बारिश….। आज सुबह से बारिश रुकने का नाम नही ले रही जानती हो, पहली बारिश याद आ गयी, उस रोज देर तक बस स्टॉप पर ठहरे रहे, अजनबी से,तुम मुझसे अनजान थी और मैं […]

सर्दी की दस्तक़ तुम आओगी न ये कोहरे वाली रातें आने को है सर्दी की दस्तक हल्की हल्की सुनाई दे रही है थोड़ा जल्दी आना, हम तो यही है पिछली मुलाक़ात से तुम जाने को […]