KumarKishan KK's Posts

किसान

खेतों के सब बीज शज़र हो जाते हैं सरहद पर वीर अमर हो जाते हैं तुम वर्दी पहने मिट्टी साने क्या बतलाते हो हम भी इनके जैसे हैं ये दिखलाते हो, सीखो जरा लाल अटल और बल्लभ से क्या होते हैं वीर-किसान देश नगर के अब उनको तुम गोली मारो या फासी लगवा दो कर्ज़ से इक़ है मरने वाला एक तुम्हारी यारी से, ये भारी है सर्द रात मगर इस दिल्ली की तान खड़े है सम्मुख किसान-जवान कर रहै है सत्ताधारी न रहे कोई जवान किसान फिर कर रह... »

अम्मा

अम्मा, एक बात कहूं ये जो तुम बकरी भैस गोबर घास में लगी रहती हो न अच्छा है, तुम अकेली तो नही बाबू की अलग सुनने की आदत, तुम्हारी थकान, तुम जो आकर शाम को सो जाती हो जानता हूँ तुम थकी रहती हो पैर का दर्द और एक गिलास मे आधे चाय दर्द दूर कर देते है? मुझे तो नही लगता… अम्मा, ये भैस बकरी बेचना मत अकेली पड़ जाओगी और मैं…. अम्मा दर्द होगा ना पैर में दबा दूं?? -कुमार किशन »

पहली बारिश

पहली बारिश….। आज सुबह से बारिश रुकने का नाम नही ले रही जानती हो, पहली बारिश याद आ गयी, उस रोज देर तक बस स्टॉप पर ठहरे रहे, अजनबी से,तुम मुझसे अनजान थी और मैं भी…. ये बारिश भी सडकों को जाम कर गयी थी न बसों का चलन न कैब कोई,मेरा रुम तो नज़दीक़ था और लगभग सूरज भी नींद में ही था, तो मैने पूछ ही लिए के, गर आपको,ठीक लगे तो कुछ देर पास में मेरा रुम है कुछ देर ठहर जाओ और किसी को कॉल करके बुला ले... »

10:30 AM

सर्दी की दस्तक़ तुम आओगी न ये कोहरे वाली रातें आने को है सर्दी की दस्तक हल्की हल्की सुनाई दे रही है थोड़ा जल्दी आना, हम तो यही है पिछली मुलाक़ात से तुम जाने को कहती हो तुम जल्दी आना जो जल्दी जा सको, वैसे भी कल आऊँगी बोलकर गयी थी, आज बरसों बीत गए तुम्हारे कल को, सो आओगी तो एक काम करना घर पर कल आउंगी बोलकर आना, शायद जाने में तुम्हें बरसों लगें, सहर अब कुछ ठंडी होने लगी है सर्दी की दस्तक हल्की हल्की सुन... »