Author: madhusudan gautam

  • शिक्षक

    मैं शिक्षक हूँ
    मुझसे अपेक्षा
    समाज करता है।
    मैं सत्य बोलूँ,
    सादा रहूँ ,
    सादा पहनू ,
    कम बोलूँ ,
    खर्च ज्यादा करूँ।
    छात्रों को न मारू,
    न डांट लगाऊं,
    जो सरकार चाहे,
    बस वह ही पढ़ाऊँ,
    चाहे छात्र कोई भी हो ,
    न धनिया मिर्ची
    हरी सब्जी लूँ ,
    कोई नेता आये ,
    तो उसे सम्मान ,
    मेरे अधिकारी से
    ज्यादा दूँ।
    अभिभावकों के ,
    सामने हाथ जोड़ ,
    खड़ा रहूँ।
    जिन्हें नही जानता ,
    उनके भी जाति,
    मूल निवास के ,
    कागजो पर हस्ताक्षर,
    झूँठी शपथ के साथ करूँ।
    मुझे चेक करने ,
    कमी पर लताड़ पिलाने ,
    का अधिकार अनेक को ,
    परन्तु मेरे अच्छे काम पर ,
    कुछ देने का अधिकार ,
    किसी को नही,
    मैं अच्छा हूँ या बुरा ,
    इसका निर्णय छात्र नही,
    अधिकारी नही,
    सत्तापक्ष के
    कार्यकर्ता करें,
    बदले मैं मुझे मिलेगा क्या?

    आप जानते ही है ,
    परम् सम्मान
    ए मास्टर…….।

    *कलम घिसाई*

New Report

Close