तुम्हारे आने की खबर सुन कर  अच्छा लगा | आओ मैं प्रतीक्षा में हूँ लम्बी क़तर में खड़ा पंजों  के बल उचक उचक कर  जैसे कोईइन्तजार  करता है -टिकिट विंडो पर | आओ जैसे पूरनामी […]

तोड़नी है खरगोश की तरह छलाँगें मारते हजार- हजार प्रपातों को कोख में दबाये खड़ी चट्टान गर्वीली !अनुर्वरा !!   तोड़नी हैं जेवरा की धारियों सी सड़कों पर पसरी गतिरोधक रेखाएँ अनसुलझे प्रश्नों का जाम […]

मैं वहीं हूँ जहाँ तुम आए थे चमरौला जूता  ठीक कराने ‘छुट्टे पैसे नही हैं‘ कह कर चले गए थे —पचास साल पहले |   आज चमचमाते जूतों पर पॉलिश कराने आए हो —   पचास […]

देहरी लाँघी नहीं घुटन में घुटती रहीं बच्चे रसोई बिस्तरे की दूरियाँ भरती रहीं बंदिशों की खिड़कियों के काँच सारे तोड़ डाले लो तुम्हें आजाद करता हूँ |  **** पायलों ने पाँव कितने आज तक […]

रुकते नहीं वो काफिले कितने चले कितने रुके ये न हम से पूछिए चल पड़े जो बाँह थामें रुकते नहीं वो काफिले | अक्षरों को जोड़ने में हिस्सा हमारा भी रहा इस अधूरी पटकथा में […]

दिन आ रहे मधुमास के शीत है भयभीत खुशनुमा वातावरण ले रहा अँगड़ाइयाँ तोड़ हिम के आवरण कह गई कोकिला कान में कुहास के दिन आ रहे मधुमास के | गुनगुनी सी धूप होगी मधुभरी […]