दिन आ रहे मधुमास के

दिन आ रहे मधुमास के
शीत है भयभीत
खुशनुमा वातावरण ले रहा अँगड़ाइयाँ
तोड़ हिम के आवरण कह गई कोकिला कान में
कुहास के दिन आ रहे मधुमास के |

गुनगुनी सी धूप होगी मधुभरी सी सुनहरी
मंजीरे बजाने आ रही मधुमती सी
मधुकरी मकरंद ले कर
झूमते झोंके झुके सुवास के |

तितलियों से भर गईं क्यारियाँ फुलवारियाँ
कलियाँ सियानी मारती रस गंध की पिचकारियाँ
ढपली बजाते मधुप चंचल फागुनी उल्लास के |

अब जलेंगीं अवदमन की थरथराती होलियाँ
देखना है राजपथ पर कब तक बँटेंगीं थैलियाँ
द्वार खुलने को विवश हैं अब नए आवास के |

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

गंध

वह अदृश्य गंध अनाम सी अपरिभाषित सी मन में बसी हुई जानी पहचानी सी जिसकी खोज ज़ारी है कल्पना के कितने ही क्षण जी उठते…

भारत कोकिला

हे भारत कोकिला! मुबारक हो तुम्हें जन्मदिन तुम्हारा। वतन के लिए कर खुद को समर्पित जीवन तेरा स्वतंत्रता को अर्पित हैदराबाद में जन्मी अघोरनाथ की…

Responses

  1. कलियाँ सियानी मारती रस गंध की पिचकारियाँ
    ढपली बजाते मधुप चंचल फागुनी उल्लास के |
    बहुत अच्छा लिखा है

New Report

Close