याद है या फिर भूल गए। वो छोटी छोटी नज़्मे मेरी शाम के वो आवरा बादल मौजों मे फिरते थे पागल शब्ज़ों का एक बाग वहाँ था पता नहीं अब किधर गया था पहुँच गया […]