तू निर्मल है तू निर्भय है , क्या बैठ यहाँ तू सोच रहा। विधि में तेरे लिखा क्या है, तू मानव है कुछ सोच रहा।। ये जीवन है जीते हैं सब, कुछ लोग यहाँ रोते […]

आज सोच रहा था कोई कविता लिखू पर कैसे ये सोच ही रहा था की तुम याद आ गयी नयन अदृश्य कामना में लीन हो गए वो संसय वो समपर्ण वो अभिधान(नाम) सब कुछ तो […]

*एक अंश तुम्हारा मुझमें है, तुम शायद जान नही पाए। हर पल मैं तुममे दिखता हूँ, तुम शायद मान नहीं पाए।।* अब कैसे मैं तुमको दिखलाऊं ये सपना नहीं हकीकत है जीवन का हर एक […]

मैं भीष्म नहीं ना अर्जुन हूँ ना और कोई अंदाज़ मेरा तेरे जीवन पर न्यौछावर ये सपनो का संसार मेरा अब साथ नहीं तो लगता है जीवन को जान नहीं पाए *हर पल मैं तुममे […]