तन को दीप बनाय के, मन में ज्योति जलाय मोती हरि आरत करें, जीवन भोग लगाय मोहक मन भावन छवि, मेघ वर्ण अति रूप मृगी नयन कोमल बदन, लज्जित मदन अनूप रूप राशि मुख चन्द्र […]

जय हे भारत स्वर्ण भूमि जय जय जननी, जय कर्म भूमि हे गंगा यमुना ब्रह्म सरस्वती पावन सतलज सिन्ध बहे विन्ध्य हिमालय गिरी अरावली मणि माणिक नवरत्न भरे जलधि हिन्द बंगाल अरब जल स्वर्ण भूमि […]

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता बहन बेटियों के, इज्ज़त धन सम्मान लुटे बिक गये धरम […]

करुणा की बारिश हुई, लथपथ हुआ शरीर ! देहियां में दीपक जला, लउका परम शरीर !!   एक रूप सब में बसा, एक ही बना अनेक ! सागर गागर में दिखे, सूरज एक अनेक !! […]

जंगल नाचत मोर है, अंगना नाचत भोर ! मैं नाचत-नाचत थका, तब तनि हुआ अंजोर !!   मनुआ माया में फंसा, भूला अपनी राह ! गहरी खाई में गिरा, राम मिले न राह !!   […]

पृथ्वी और आकाश में एक पुरुष का वास ! कण-कण जिससे व्याप्त है, जीवन, मृत्यु, प्रकाश !!   पूरब कोई पश्चिम कहे, पृथ्वी और आकाश ! कण-कण में मुझको दिखे, आगे पीछे  पास !!   […]