Navnita Kumari's Posts

ये तो वही किसान है

चिड़ियों के चहचहाने से पहले, बैलो के रंभाने से पहले जो जाग जाता है, ये तो वही मेहनत का पुजारी किसान है| अन्न को उपजाने में जिसकी दिन-रात बहती लहू और जिसकी लगती जान है, ये तो वही किसान है | अन्नदाता ही अन्न को आज मोहताज है, जिसके भरोसे कितनों के चुल्हों में आग सुलगते है, और जिसके कारण आज दंभ भरते बड़े साहूकार है , ये तो वही मेहनतकस किसान हैं| कर्ज,तकलीफ और बेरोजगारी ही आज किसान की किस्मत बनी है, घु... »

अलविदा 2020 नववर्ष की चाहत में

नववर्ष आया है, झूमो, नामों सब खुशियाँ मनाओ, दहशत भरी 2020 की यादें को अब अलविदा कह जाओ | नई उमंगे, नई उम्मीदों के साथ अपना पग खुशहाली की ओर बढ़ाओ | बुरे वक्त में भी साथ निभाने का आओं अब ये कसम खाए, बुरा वक्त अब तुमको जाना होगा, खुशियाँ अब तुमको आना होगा | बुरे वक्त में हम इतना संयम दिखाई, कोरोनाकाल के सभी सहयोगी के सहादतों को तो हम भूलकर भी हम भूला ना पाएँगे | पर इस नववर्ष में उम्मीदों के किरण जगा... »

अलविदा 2020नववर्ष की चाहत में

नववर्ष आया है झूमो नाचो सब खुशियाँ मनाओ, दहशत भरी 2020 की यादों को अब अलविदा कह जाओ | नई उमंगे, नई उम्मीदों के साथ अपना पग खुशहाली की ओर बढ़ाओ, बुरे वक्त में भी साथ निभाने का आओ अब ये कसम खाए | बुरे वक्त अब तुमको जाना होगा, खुशियाँ अब तुमको अाना होगा, बुरे वक्त में हम इतना संयम दिखाए | कोरोना काल के सभी के सहादतों को तो हम भूलकर भी हम भूला ना पाएगें | पर इस नववर्ष में उम्मीदों के किरण जगाएगें आने ... »

तोहफा वो अनमोल था

तोहफा वो अनमोल था आज शुकून भी मिल जाता,काश कोई झूठा ही सही पर कोई हमदर्द ही निकल जाता | इसी चिंता से मेरा मन विकल था,पर उसकी आँखो में इतिहास ना कोई सरल था | पर उसका होना ही मेरे वजूद का परितय था, पर ये मेरे दर्द पर मेरा पहला विजय था | कुछ ही पल मे दूर हो चला सारा शिकवा -गिला था | ऐसा प्यार भरा तोहफा मुझे पहली बार मिला था | तोहफा पाकर मै प्रसन्न थी,ना जाने कौन -सी जीती मैने जंग थी | पर इतना मुझे सम... »

विजयादशमी हम मनाते है

विजयादशमी हम मनाते है पर अपने अंदर के रावण को कहाँ जलाते है ? कटाक्ष कर रही है भगवान श्री राम की सच्चाई और निष्ठा ,रावण जैसे दुराचारी के क्रोध,कपट,कटुता,कलह,चुगली ,अत्याचार | दगा,द्वेष,अन्याय,छल रावण का बना परिवार , आज कहाँ मिलते है माता सीता जैसे निश्छल विचार | वर्तमान का दशानन,यानी दुराचार भ्रष्टाचार , आओ आज दशहरा पर करे,हम इसका संहार | कागज के रावण मत फूँको, जिंदा रावण बहुत पड़े है, अहंकार,आज इ... »