आज तो यह सूरज जैसे लाया एक नई भोर, छोड़ के शहर का सारा शोर, चली है यह बंजारन उन पहाड़ों की ओर। घुलना है इन महकती हवाओं में, उड़ना है परिंदों जैसे इन फिज़ाओं […]