Author: Nisha Nayak

  • माँ

    ऊँगली पकड़कर तूने चलना सिखाया,
    हमारे मन से तूने डर को मिटाया ।
    जो चाहे वो सबकुछ लाके दिया,
    बदले में हमसे कुछ नहीं माँगा ।
    अपना दुःख तू सबसे छिपाती है,
    ओ माँ ! तू हि मेरी संपत्ति है।
    पेड़ कि तरह तूने छाया सी है,
    छाया बनके तू हमेशा खदि है ।
    ज़िन्दगी का पाठ तूने पढ़ाया ,
    ओ माँ ! हमने तुझे बहुत सताया ।
    तूने दिन रात काम किया ,
    अपनी डान्त् में तूने प्यार को छिपाया ।
    हमारे सुख में तू हस्ती है,
    हमारे दुःख में तू रोती है,
    ज़िन्दगी में हज़ारों पाठ सिखाने वाली सिर्फ माँ होती है ।

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