Author: Pokaran college

  • जीवन

    जीवन जीने की कला
    सीख लो जग से
    सब कुछ मिल जाएगा यहाँ
    बिना किसी मौल के
    अपना बनाना है तो
    सरल ह्रदय बन
    लोगों से मिल
    स्नेह और विश्वास
    बाँट दे सब में
    अपने पराये से दूर
    सबके दिलों का मेल कर
    फिर देख
    दुनिया कितनी खूबसूरत है
    बस आजमाने का ढ़ंग हो
    जी तो लेते होंगे
    हर कोई
    पर
    अपनों के पास रह
    न गैर से दूर ।

    डॅा० जयपाल

  • इंसान

    यूँ तो चला है चाँद पर घर बसाने के लिए
    पर ढंग से धरती पर जी पाया है क्या आदमी
    ज्ञानी ,ध्यानी दानी और संस्कारी भी बना
    पर इंसान बन पाया है क्या आदमी .

  • मां तेरा तो बच्चा हूँ

    घुटनों के बल सरक सरक
    कब पैरों से चलना सीखा
    तेरे आँचल की ओट में
    न जाने कब बड़ा हुआ
    तेरे हाथों की नरमाई
    जीने का मतलब सीखा
    पर
    मैं जहाँ भी जाता हूँ
    तेरी परछाई बन जाता हूँ
    वही सीधा सादा भोला भाला
    नन्हा सा बच्चा हूँ
    कितना भी बन जाऊ बड़ा
    माँ तेरा तो बच्चा हूँ .

  • जान

    फूलों से कोमल
    मासूम सी जान
    क्यों कर
    चुभती है उन्हें
    जो
    न आने देना चाहते है
    कभी जमीं पर .
    डा .जी .एल.जयपाल

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