जीवन जीने की कला सीख लो जग से सब कुछ मिल जाएगा यहाँ बिना किसी मौल के अपना बनाना है तो सरल ह्रदय बन लोगों से मिल स्नेह और विश्वास बाँट दे सब में अपने […]

यूँ तो चला है चाँद पर घर बसाने के लिए पर ढंग से धरती पर जी पाया है क्या आदमी ज्ञानी ,ध्यानी दानी और संस्कारी भी बना पर इंसान बन पाया है क्या आदमी .

घुटनों के बल सरक सरक कब पैरों से चलना सीखा तेरे आँचल की ओट में न जाने कब बड़ा हुआ तेरे हाथों की नरमाई जीने का मतलब सीखा पर मैं जहाँ भी जाता हूँ तेरी […]

फूलों से कोमल मासूम सी जान क्यों कर चुभती है उन्हें जो न आने देना चाहते है कभी जमीं पर . डा .जी .एल.जयपाल