कागज पे हालाते-दिल लिखते हुये इक दिन मौत आ जानी है मुझे मरते , तड़पते , बिलखते हुये इक दिन मौत आ जानी है !! लापता है कई रास्ते मुझ में ,कल रात घर खोने […]
कागज पे हालाते-दिल लिखते हुये इक दिन मौत आ जानी है मुझे मरते , तड़पते , बिलखते हुये इक दिन मौत आ जानी है !! लापता है कई रास्ते मुझ में ,कल रात घर खोने […]
ख़ुदकुशी करने के मैं रोज बहाने ढूँढने लगा हूँ जी में रड़क रही है साँसे जैसे मैं मरने लगा हूँ सीने के जख्मों पे लौट कर कोई बहार आई है सूना-सूना था भीतर से मैं […]
जी में रड़क रही है साँसे की बस मर जाऊँ मैं बे-वक़्त के दिले-बीमार आहे किसे सुनाऊँ मैं मेरे टूटे हुये दिल की अब सदा हो गई हो तुम इस दर्दे-दिल को अब और कैसे […]
जी में रड़क रही है साँसे की बस मर जाऊँ मैं बे-वक़्त के दिले-बीमार आहे किसे सुनाऊँ मैं मेरे टूटे हुये दिल की अब सदा हो गई हो तुम इस दर्दे-दिल को अब और कैसे […]
जी में रड़क रही है साँसे की बस मर जाऊँ मैं बे-वक़्त के बीमार दिल ले के किधर जाऊँ मैं
आँखों में अब आंसू छिपाना कितना मुश्किल है जो रडकते है उनको बहाना कितना मुश्किल है !! साँसों पे लिख लिया तुझको मैंने आयत की तरह तक़दीर का ये लिखा मिटाना कितना मुश्किल है !! […]
होठों को होठों से यूँ तुम दबाते क्यूँ हो बेचैनियां मेरी रोज यूँ तुम बढ़ाते क्यूँ हो ।। तेरे ये होंठ जानते है , मेरी सब हसरतें अगर बेखबर हो ,तो तुम शर्माते क्यूँ हो […]
बच्चों के स्कूल जाते ही सूना घर ,घर को खाता है ख़ुशी से मुफलिसी का बेटा कहाँ कारखाने जाता है !! भूख तोड़ देती है इक-इक ख्वाईशों के सब खिलौने, कोई पत्थर तोड़ता है,कोई अखबार […]
जिंम्मेदारियों का बोझ मैं उठा’के रखता हूँ मेले में बेटे को काँधे पे बिठा’के रखता हूँ ।। आसमां ये मुझे कभी खरीद नहीं सकता मैं पाँव हमेशा जमीं पे टी’काके रखता हूँ ।। रखते होंगे […]
ज़िन्दगी खफा है अब मनाऊँ किस तरह दिल पे चोट है अब मुस्कुराऊँ किस तरह चोट कोई अंदर है जिससे टिस उठती है चिर से दिल दर्द अब दिखाऊँ किस तरह आँखों के तलवों निचे,काई […]
आँखों की दीवारों में नमी अब बैठने लगी भीतर की सब कच्ची , दीवारे ढहने लगी !! दर्द से अश्क़ो की मौजें , जब तड़पने लगी दुखती हुई रग दिल में और भी दुखने लगी […]
इक सी तहरीरें है गीता-ओ-क़ुरान में क्या फर्क है हिन्दू और मुस्लमान में ।।
खाकी – खद्दर पहने हुये , इंसान बिकने लगे कोडियों में यहाँ लोगो के,ईमान बिकने लगे ।। कही मुर्दे तो,कही आज शमशान बिकने लगे, चदरों पे खुदा,पत्थरो में भगवान बिकने लगे ।। सब की सब […]
ज़िंदगी मुझसे मैं ज़िन्दगी से ऊब गया रख के जहन में तुझे , मैं तुझे भूल गया !! वो शहर वो गली वो रास्ते सब वही पे है लेकिन छोड़ में मुझे तनहा वो दूर […]
ज़िन्दगी में तजुर्बों की इक किताब रख चेहरे देख परख और उनका हिसाब रख !! मुझे बे-घर कर दिया नींद के फरिश्तों ने सूनी आँखों पे पहले तू कोई ख्वाब रख !! खुद ही खुद […]
आँखों में दर्द की मौजे अब मचलने लगी साँसे ही मेरी अब साँसों को चुभने लगी जब से रुत-ए-बाहर तेरी यादों की आई है जर्द आँसू टूट के आँखें अब उजड़ने लगी न जाने कौन […]
पानी आँखों में ठहरा दिखाई देता है सीने में ज़ख्म गहरा दिखाई देता है अजीब दर्द लिए फिर रहा हूँ सीने में पुराना है मगर हरा दिखाई देता है घर की हर बात सुर्ख़ियों में […]
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