शांति की घूंघट ओढ़, पहिया घूमे, मिट्टी की मूर्ति सजे, दिल रोम-रोमे। हाथों का नृत्य, सौम्यता से सजा, प्रेम का मार्गदर्शन, रचना की अपार। मिट्टी की गुप्त बातें, प्राचीन और बुद्धिमान, कला के स्पर्श से, […]

शांति की घूंघट ओढ़, पहिया घूमे, मिट्टी की मूर्ति सजे, दिल रोम-रोमे। हाथों का नृत्य, सौम्यता से सजा, प्रेम का मार्गदर्शन, रचना की अपार। मिट्टी की गुप्त बातें, प्राचीन और बुद्धिमान, कला के स्पर्श से, […]