शांति की घूंघट ओढ़, पहिया घूमे,
मिट्टी की मूर्ति सजे, दिल रोम-रोमे।
हाथों का नृत्य, सौम्यता से सजा,
प्रेम का मार्गदर्शन, रचना की अपार।
मिट्टी की गुप्त बातें, प्राचीन और बुद्धिमान,
कला के स्पर्श से, आदर्शी में जान।
हर धारा और मोड़, एक गाना समर्पित,
मिट्टी में मौजूद ख्वाब, जगमगाते जगति।
उंगलियाँ सहलाएं, सहजता के जैसी,
एक वास्तु निर्माण, सौंदर्य का प्रकटी।
हर रेखा और घुमाव, अनुभवों की सजा,
मूर्ति का अद्वितीयता, समय का आलोचक।
शब्दों की रौशनी धीरे-धीरे मिटे,
प्रकृति के छाप संग, यादें बने।
खूबसूरत वस्त्र जैसी इकाई,
जीवन के संगीत में, स्वर महान।
इसलिए आइए इस कला को मान्य करें,
जहां कलाकारी और पृथ्वी मिलकर गहराते।
मिट्टी की भाषा, आत्मा का गुंजारा,
जो हमें पूर्ण करती है, चुप्पी की कहानी।
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