आँख ऐसी कि कमल तुमसे निशानी मांगे , जुल्फ ऐसी कि घटा शर्म से पानी मांगे | हुस्न ऐसा कि अजंता का अमल याद आये, संगमरमर में ढला ताजमहल याद आये ||