Author: Rakhi pandey Rp

  • Aankh

    आँख ऐसी कि कमल तुमसे निशानी मांगे ,
    जुल्फ ऐसी कि घटा शर्म से पानी मांगे |
    हुस्न ऐसा कि अजंता का अमल याद आये,
    संगमरमर में ढला ताजमहल याद आये ||

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