Aankh

आँख ऐसी कि कमल तुमसे निशानी मांगे ,
जुल्फ ऐसी कि घटा शर्म से पानी मांगे |
हुस्न ऐसा कि अजंता का अमल याद आये,
संगमरमर में ढला ताजमहल याद आये ||

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जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

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