खुल के भले ही न कहा हो कभी पर अपनी “देह-बोली” से कितनी ही बार जताती है वो तुमसे कितना ….. कभी ख्याल किया तुमने तुम्हारे कमरे के करीब से गुजरते वक़्त ठिठक कर कितनी […]

सैकड़ों आंसू …. , यूं ही नहीं …. खज़ाने में मेरे , जब भी कोई रोता है , उसके आंसू बटोर लाता हूं . किसके हैं … , कब गिरे थे … वज़ह …… बता […]