Ravikant Raut, Author at Saavan's Posts

वो कहती नहीं …पर जताती तो है

वो कहती नहीं …पर जताती तो है

खुल के भले ही न कहा हो कभी पर अपनी “देह-बोली” से कितनी ही बार जताती है वो तुमसे कितना ….. कभी ख्याल किया तुमने तुम्हारे कमरे के करीब से गुजरते वक़्त ठिठक कर कितनी ही बार तुम्हें देख कर मुस्कुराती है वो तुम्हारे टेक्स्ट-मेसेज़ का जवाब अगले ही सेकेंड क्यूं दे देती है वो फिर भले ही उसे जवाब देना भूल ही क्यूं न जाओ तुम »

मां : दो पहलू ममता के

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मोहब्बत

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मेरी कविता

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मां

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ज़िस्म

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… और मैं खुश रहता हूं

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मर्जी उसकी

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मैं आंसू बटोर लाता हूं

सैकड़ों आंसू …. , यूं ही नहीं …. खज़ाने में मेरे , जब भी कोई रोता है , उसके आंसू बटोर लाता हूं . किसके हैं … , कब गिरे थे … वज़ह …… बता सकता हूं . उंगलियों के पोरों पर रख … गिरने का…. वक़्त बता सकता हूं . सफर अनज़ान ही सही .. पर खत्म किस जगह … वो मंज़िल बता सकता हूं आंसूओं से मिलान आसूओं का कर .. फ़र्क़ बता सकता हूं आंखों के….. मज़हब से …..न... »