Author: RHYTHM PANDEY

  • खुदमें

    रहने लगा हूं कुछ दूर सबसे
    गुजर गया एक वक्त जबसे मिला नहीं हूं खुदसे
    खो चुका हूं खुदको या कतराता हूं खुदको ढूंढने से?
    हु बे-असर या ठहरा रखे हैं सब जज़्बात खुद में?
    है सवाल ये खुदसे ही क्यों हु छुपाता मैं सब खुद में ही?
    है जवाब शायद मुझमें ही मगर क्यों नहीं संभल पर मैं खुदको ही?

    –कयाहीकहे

  • अधूरी

    कुछ बातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई

    कुछ मुलाकातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई

    कुछ ख़्वाहिशें पूरी करनी थी साथ तुम्हारे मगर अधूरी रह गई

    कुछ लम्हे गुजारने थे संग तुम्हारे मगर वो तमन्ना भी अधूरी रह गई

    बुन्नी थी एक ज़िंदगानी संग तुम्हारे मगर वो दास्तान भी अधूरी रह गई

    दिल की हजारों बातें बांटनी थी तुमसे मगर अफसोस वो हर एक बात अधूरी रह गई…

  • खुदमें

    कुछ बातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई

    कुछ मुलाकातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई

    कुछ ख़्वाहिशें पूरी करनी थी साथ तुम्हारे मगर अधूरी रह गई

    कुछ लम्हे गुजारने थे संग तुम्हारे मगर वो तमन्ना भी अधूरी रह गई

    बुन्नी थी एक ज़िंदगानी संग तुम्हारे मगर वो दास्तान भी अधूरी रह गई

    दिल की हजारों बातें बांटनी थी तुमसे मगर अफसोस वो हर एक बात अधूरी रह गई…

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