रहने लगा हूं कुछ दूर सबसे
गुजर गया एक वक्त जबसे मिला नहीं हूं खुदसे
खो चुका हूं खुदको या कतराता हूं खुदको ढूंढने से?
हु बे-असर या ठहरा रखे हैं सब जज़्बात खुद में?
है सवाल ये खुदसे ही क्यों हु छुपाता मैं सब खुद में ही?
है जवाब शायद मुझमें ही मगर क्यों नहीं संभल पर मैं खुदको ही?
–कयाहीकहे
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