अब क्यों धीर धरे हो अधीर बनो, अधीर बनो मां भारती के लाल तुम हो सर्व शक्तिमान विजय की पताका ले हाथ दुश्मन की ग्रीवा का रक्त पीने वाली तुम शमशीर बनो, शमशीर बनो अब […]

अब क्यों धीर धरे हो अधीर बनो, अधीर बनो मां भारती के लाल तुम हो सर्व शक्तिमान विजय की पताका ले हाथ दुश्मन की ग्रीवा का रक्त पीने वाली तुम शमशीर बनो, शमशीर बनो अब […]

इंसान और मै मन्दिर , मस्जिद नहीं देखता हूं उस में बेठा भगवान देखता हूं हिन्दू, मुस्लिम नहीं देखताहू इंसान में इंसान देखता हूं हैरान हूं मै यह देखकर लोग पूछते है मेरा धर्म कोनसा […]

बन बंजारा बन -बन भटकत है मन मेरे तु कहा अटकत है तुझे ढूढन को में मन्दिर-मन्दिर फिरत तू मेरे मन मन्दिर में बसत है हर एक गोपी को पूंछा करता दिल को अपने, अंगारों […]