अब क्यों धीर धरे हो
अधीर बनो, अधीर बनो
मां भारती के लाल
तुम हो सर्व शक्तिमान
विजय की पताका ले हाथ
दुश्मन की ग्रीवा का रक्त पीने वाली तुम
शमशीर बनो, शमशीर बनो
अब क्यों धीर धरे हो
अधीर बनो ,अधीर बनो
रक्त में है उबाल, मातृभूमि रही पुकार
गलतियों का करो अब हिसाब
पीओके के साथ सिंध पर भी धरो ध्यान
सुन कर अरिदल थर थर कांपे वो तुम
गीत बनो गीत बनो
अब क्यों धीर धरे हो
अधीर बनो अधीर बनो
शिवराज खटीक
अधीर बनो,अधीर बनो
Comments
7 responses to “अधीर बनो,अधीर बनो”
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Nice
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Very nice
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Wah
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Very nice
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Good
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क्या बात
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Nice
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