और फिर आख़िर में, सब हुआ इक़रार से, इज़हार तक तकलीफ़ से, तवज्जो तक रहीम से, मीरा तक; ……. पिछले दिन कारनेस में से वो बक्सा निकाला, मानो टूटें अल्फ़ाज़ों को काग़ज़ पर निकाला नज़रें […]

और फिर आख़िर में, सब हुआ इक़रार से, इज़हार तक तकलीफ़ से, तवज्जो तक रहीम से, मीरा तक; ……. पिछले दिन कारनेस में से वो बक्सा निकाला, मानो टूटें अल्फ़ाज़ों को काग़ज़ पर निकाला नज़रें […]