देख झंझावातों से परे पुनः
भौर सुहानी आएगी
ये स्वप्न नहीं हकीकत है
प्रकृति में फिर रवानी आएगी
Author: Simran Kaur
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प्रकृति में
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किताबे
किताबे तो बड़ी होती गयी सारी
वज़न बढ़ता गया उनका
मेरा बस्ता पुराना हो रहा था , फट रहा था
ना जाने कहा गिर पड़ा टुकड़ा वो मेरा आसमां का ..